Thursday, June 27, 2019

काल सर्प योग या दोष | कालसर्प निवारण, प्रकार व उपाय | Kaal Sarp Dosh in Hindi

जानिए क्या है कालसर्प दोष और कालसर्प दोष कुंडली में कैसे बनता हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य, चंद्रमा, बुध, शुक्र, शनि, गुरु, राहु, केतु और मंगल ग्रह नवग्रह होते हैं और यदि यह सात गृह सूर्य, चंद्रमा, बुध, शुक्र, शनि, गुरु, और मंगल राहु और केतु के बीच में आ जाते हैं या फंस जाते हैं तो कालसर्प दोष कुंडली में बन जाता हैं। कुंडली में कालसर्प दोष के प्रभाव बहुत बुरे और अच्छे भी हो सकते हैं। आज इस वीडियो द्वारा हम जानेगे की कालसर्प दोष के और कितने प्रकार होते हैं और उनका जातक की कुंडली व पर क्या प्रभाव पड़ता हैं। हम यह भी जानेगे की कुंडली में कालसर्प दोष हो तो हमे क्या उपाय करना चाहिए। कालसर्प दोष को वैदिक ज्योतिषशास्त्र में सबसे घातक दोष माना गया हैं। लेकिन ऐसा नहीं हैं की कालसर्प दोष का निवारण नहीं हैं। अगर कुंडली में कालसर्प दोष हैं तो इसके अच्छे और बुरे दोनों ही प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। कालसर्प के बुरे प्रभाव इतने बुरे होते हैं की यह किसी राजा को भी रंक बना सकता हैं और अगर इसके प्रभाव अच्छे हुए तो यह उस जातक को जिसकी कुंडली में कालसर्प दोष बना बैठा हैं उसे काम समय में, कम मेहनत कराये बिना उच्चाईयो तक लेकर जा सकता हैं। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार कालसर्प दोष को कुंडली में सबसे ख़राब ग्रह स्थिति में से एक आँका जाता हैं जो उस मनुष्य के जीवन को पीड़ाओं, दुख व चुनोतियो से भर देता हैं। कालसर्प का पूरा विवरण अभी जाने।

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